आज के युग में जहां ब्राह्मण अपने मूल कर्म से विमुख हो रहे हैं ।आधुनिक चकाचौंध से प्रभावित ब्राह्मण अन्य व्यवसाय की ओर आकर्षित हैं । ब्राह्मण परिवार के बच्चे फिल्मों,विडियो गेम की ओर रूझान लिए हुए हैं । वहीं एक अबोध बालक अपने दादा के दिए संस्कारों को संजोए हैं । गुना निवासी श्री मोहन शर्मा जो स्वयं श्रीरामचरित मानस के नियमित पाठक हैं,नें अपने पोते की धर्म कर्म में रूचि देखते हुए संस्कृत श्लोकों की शिक्षा दी और बालक अनंत नें तन्मयता से सिखा । दादा के दिए संस्कार अनंत में पल्लवित हो ऐसी शुभ कामनाऐं
होनहार बिरवान के होत चिकने पात

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